- Format
- Bog, paperback
- Hindi
- 154 sider
Normalpris
kr. 144,95
Medlemspris
kr. 129,95
- Du sparer kr. 15,00
- Fri fragt
-
Leveringstid: 7-12 Hverdage (Sendes fra fjernlager) Forventet levering: 10-03-2026
- Kan pakkes ind og sendes som gave
Beskrivelse
यह पुराण सर्वप्रथम भगवान् वराह ने पृथ्]वी को सुनाया था, इसी कारण इसे -वराह पुराण' कहा जाता है। वस्]तुत भगवान् विष्]णु ने ही पृथ्]वी के उद्धार के लिए वराहावतार धारण किया था। इस अवतार में भगवान् वराह ने हिरण्]याक्ष नामक दैत्]य का वध कर पृथ्]वी को एक सहस्र वर्ष तक अपने विशालमुख पर धारण किया था। इसके बाद नियम स्]थान पर स्]थापित होने के पश्]चात पृथ्]वी द्वारा भगवान् वराह के स्]वरूप से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्]तुत करने पर भगवान वराह ने उन्]हें पौराणिक तथा गूढ़ ज्ञान का उपदेश दि︎या था। भगवान् वराह द्वारा पृथ्]वी को दि︎ए गए उसी दि︎व्]य ज्ञान का इस पुराण पुराण में विस्]तृत विवेचन किया गया है।
Detaljer
- SprogHindi
- Sidetal154
- Udgivelsesdato30-11-2021
- ISBN139788128805639
- Forlag diamond pocket books pvt ltd
- FormatPaperback
- Udgave0
Størrelse og vægt
10 cm
Anmeldelser
Vær den første!
Log ind for at skrive en anmeldelse.