भवभूति के महाकाव्य
- Criticism of the Works of Novelists, Poets, Playwrights, Short-Story Writers, and Other Creative Writers Who Liv
- Format
- Bog, paperback
- Hindi
- 188 sider
Normalpris
Medlemspris
- Du sparer kr. 25,00
- Fri fragt
-
Leveringstid: 7-12 Hverdage (Sendes fra fjernlager) Forventet levering: 17-03-2026
- Kan pakkes ind og sendes som gave
Beskrivelse
संस्कृत महाकवी भवभूति का उत्तररामचरित, महावीरचरित और माततीमाधव महाकाव्यों पर आधारित रत्नाकर का छंदयुक्त काव्यमय प्रस्तुति. कहा जाता है कि वैदर्भीय पंडित भवभूति की रसना पर सरस्वति विराजमान थी. प्रस्तुत महाकाव्य न ही भवभूति को आनुवार है ला ही टीका है. भवभूति का 256 श्लोकों वाला मूल महाकाव्य रत्नाकर के 1075 दोहों और 52 रागबद्ध गीतों के साथ रसयुक्त और अलंकृत किया गया है. ञस महाकाव्य के साथ साथ पाठकों को रत्नाकर का महान ग्रंथ कालिदास के आठ महाकाव्य भी ज्ञान परक एवं रुचिकर लगेगा. कालिदास के काव्यों में भाषा की प्रौढ़ता, वाणी में माधुर्य, विचार में उदारता, वचनों में गांभीर्य, आदर्श कल्पनाएँ और घटनाओं में तारतम्य पाया जाता है. महाकवि कालिदास जी कान्यकुब्ज दरबार के नवरत्नों में अग्रगण्य थे और महाकवि भवभूति भी एक महान राजकवि थे.
Detaljer
- SprogHindi
- Sidetal188
- Udgivelsesdato13-03-2022
- ISBN139781989416204
- Forlag PC Plus Ltd.
- FormatPaperback
- Udgave0
Størrelse og vægt
10 cm
Anmeldelser
Vær den første!