- Format
- Bog, paperback
- Hindi
- 500 sider
Normalpris
Medlemspris
- Du sparer kr. 25,00
- Fri fragt
-
Leveringstid: 7-12 Hverdage (Sendes fra fjernlager) Forventet levering: 10-03-2026
- Kan pakkes ind og sendes som gave
Beskrivelse
इस उपन्यास का मुख्य पात्र रावण है, न कि राम। इसमें रावण के चरित्र के अन्य पक्ष को रेखांकित करते हुए उसको राम से श्रेष्ठ बताया गया है। 'वयं रक्षामः' एक उपन्यास तो अवश्य है; परंतु वास्तव में वह वेद, पुराण, दर्शन और वैदेशिक इतिहास-ग्रंथों का दुस्सह अध्ययन है। हिंदुस्तान की आर्य संस्कृति पर इस पुस्तक में कुछ इस तरह आचार्य चतुरसेन प्रकाश डालते हैं- 'उन दिनों तक भारत के उत्तराखण्ड में ही आर्यों के सूर्य-मण्डल और चन्द्र मण्डल नामक दो राजसमूह थे। दोनों मण्डलों को मिलाकर आर्यावर्त कहा जाता था। उन दिनों आर्यों में यह नियम प्रचलित था कि सामाजिक श्रंखला भंग करने वालों को समाज-बहिष्कृत कर दिया जाता था। दण्डनीय जनों को जाति-बहिष्कार के अतिरिक्त प्रायश्चित जेल और जुर्माने के दण्ड दिये जाते थे।
Detaljer
- SprogHindi
- Sidetal500
- Udgivelsesdato03-01-2022
- ISBN139789354621529
- Forlag True Sign Publishing House
- FormatPaperback
- Udgave0
Størrelse og vægt
10 cm
Anmeldelser
Vær den første!